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संदीप कंबोज
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जो छुपाया जा रहा है वही खबरदार भारत दिखाएगा हम किसी पार्टी या नेता के गुलाम नहीं हम सिर्फ सत्य और संविधान के साथ

“गुलामी नहीं, केवल सत्य और संविधान के साथ”

सरकारी स्कूलों में ये चल क्या रहा है? ‘बैड टच’ की क्लास वाले लफ्ंगे ‘गुरु जी’ कौन?

पानीपत के सरकारी स्कूल में महिला पीजीटी को बैड टच करते आ रहे पीटीआई की शर्मनाक करतूत ने सरकारी स्कूलों पर फिर लगाया धब्बा

  • कब तक हमारी बेटियों और महिला शिक्षिकाओं को नोचते रहेंगे ‘गुरु’ के भेष में छिपे दरिंदे!
  • ये शिक्षा के मंदिर या हवस के अड्डे? , पूरे सिस्टम को बदनाम करने वाले ‘लफ्ंगों’ को जेल में डालो सरकार
  • देशभर से सामने आ रहीं घटनाओं ने हिला दी शिक्षा व्यवस्था की नींव
  • पानीपत, करनाल समेत कई सरकारी स्कूलों से सामने आई हैवान पुरुष अध्यापकों की शर्मनाक करतूतों से देश शर्मसार

    Government School Scandal: PTI Teacher Accused of Bad Touching Female PGT in Panipat

संदीप कम्बोज। खबरदार भारत
सरकारी स्कूलों में आखिर आजकल क्या चल रहा है? क्या यहां वास्तव में पढ़ाई चल रही है या हवस और ‘बैड टच’ की क्लास। क्योंकि पिछले कुछ दिनों व माह में देश के अलग-अलग सरकारी स्कूलों से आई घटनाओं ने सिस्टम में छिपे भेड़ियों की वो पोल पट्टी खोल डाली है जिसने समाज व देश को सोचने पर मजबूर कर दिया है। हम अपनी बच्च्यिों व बेटों को स्कूल भेजकर निश्चिंत हो जाते हैं कि वे वहां पढ़ाई करने जा रहे हैं लेकिन जब वही बच्चे स्क्ूल जाकर अध्यापकों की शर्मनाक करतूतें देखते हैं तो वे उनका कितना सम्मान करेंगे, यह बताने की जरुरत नहीं है। हाल ही में हरियाणा के पानीपत जिले के सरकारी स्कूल में एक पीटीआई ने महिला पीजीटी को न केवल बैड टच किया बल्कि अश्लील इशारे व गलत हरकत भी की। वहीं बठिंडा के एक सरकारी स्कूल के मैथ अध्यापक ने तो बेशर्मी की तमाम हदें पार करते हुए महिला अध्यापिका को बहाने से एकांत लैब में बुलाकर उसके हाथों को दबाकर चूमा चाटी शुरु कर दी। हालांकि महिला अध्यापिका ने हिम्मत दिखाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज करवाकर इस हवसी मास्टर की करतूत को बेनकाब किया। गुगल सर्च में जाएं और देखें गुगल सैकड़ों ऐसे मामलों से भरा पड़ा है जहां हवसी दरिंदें अध्यापकों द्वारा छात्राओं व अध्यापिकाओं की इज्जत पर हाथ डालने के समाचार सुर्खियां बटोर रहे हैं। क्या यह हम सभी के लिए चिंता का विषय नहीं है। जिन घरों की बच्चियां स्कूलों में जाती हैं या जिन घरों की महिलाएं स्कूलों में अध्यापिकाएं हैं, क्या उन्हें अब चिंता करने की जरुरत नहीं है। क्योंकि स्कूलों मेंं कई ऐसे कमरे, लैब्स होते हैं जो एकांत में होते हैं और वहां किसी का कम ही आना जाना होता है। और ये हवसी दरिंदे मास्टर ऐसे ही कमरों में महिला अध्यापिकाओं और छात्राओं का शिकार करते हैं। जैसा कि बठिंडा वाले सरकारी विद्यालय में हुआ है। हर माता-पिता अपने बच्चे को स्कूल इसलिए भेजता है क्योंकि उसे लगता है कि विद्यालय शिक्षा का मंदिर है जहाँ शिक्षक भगवान का रूप होता है जहाँ बच्चियों को सुरक्षा, संस्कार और ज्ञान मिलेगा लेकिन अब सवाल उठ रहा है क्या सचमुच स्कूल सुरक्षित बचे हैं? क्या हमारी बेटियाँ और महिला अध्यापिकाएँ सरकारी स्कूलों में सुरक्षित हैं?या फिर शिक्षा व्यवस्था के भीतर ही कुछ ऐसे ‘हवसी भेड़िए’ बैठ चुके हैं, जिन्होंने गुरु और छात्रा के पवित्र रिश्ते को कलंकित कर दिया है? हरियाणा, दिल्ली,पंजाब, राजस्थान,उत्तर प्रदेश, बिहार व चंडीगढ़ से लगातार एक जैसी खबरें सामने आ रही हैं। पुरुष अध्यापको द्वारा कहीं छात्राओं के साथ बैड टच तो कहीं महिला शिक्षिकाओं से अश्लील हरकतें, कहीं परीक्षा कक्ष तक सुरक्षित नहीं और कहीं प्रिंसिपल और शिक्षक ही स्कूल को शर्मसार करते दिखाई दे रहे हैं। और इन सब घटनाओं में सबसे खतरनाक बात क्या है? हर मामले में सबसे पहले आरोपी को ‘बचाने’ की कोशिश होती है। कोई भी शिकायत आती है तो स्कूल प्रबंधन, प्राचार्य और शिक्षा विभाग मिलकर मामले को दबाने में लग जाते हैं। छात्राओं और महिला शिक्षिकाओं को समझौते के लिए दबाव डाला जाता है। आरोपी से माफी मंगवाकर मामला खत्म करने की कोशिश होती है ताकि हवस का सौदागर अध्यापक कानूनी सजा से बच जाए। यहां सबसे बड़ा सवाल है क्या किसी बच्ची की इज्जत और मानसिक सुरक्षा इतनी सस्ती हो चुकी है कि एक ‘सॉरी’ बोल देने से मामला खत्म हो जाए? हम यहां ये बिल्कुल नहीं कह रहे कि सभी पुरुष शिक्षक गलत हैं या हवस के सौदागर हैं लेकिन आज जो सरकारी स्क्ूलों से लगातार सामने आ रही इस तरह की घटनाएं खुद ही इन जैसे शैतानों को कटघरे में खड़ा कर रही हैं जिनका मकसद ही सिर्फ और सिर्फ हवस तक सिमटकर रह गया है। स्कूलों के एकांत कमरों और लैबस में अकेली महिला अध्यापिकाओं और बच्चियों कोटारगेट करने वाले ऐसे शैतानों को अब जेल की सलाखों में पहुंचाने का समय आ गया है। राज्यों के महिला आयोग को भी चाहिए कि वे इस विषय पर कोई सख्त कदम उठाते हुए ऐसे हवसी दरिंदे अध्यापकों को जेल की सलाखों में पहुंचाएं और जो विद्यालय प्राचार्य या विभागिय अधिकारी इस तरह की घटनाओं को दबाने का प्रयास करते हैं उन्हें भी तत्काल प्रभाव से सस्पेंड करके जेल में डाला जाए।

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घटना-दर-घटना खुलती भयावह तस्वीर : इन 10 घटनाओं से समझें सरकारी स्कूलों में आखिर चल क्या रहा है

घटना-1 : पानीपत में लेडी टीचर को मौका पाकर बेड टच करता आ रहा पीटीई
यह घटना हाल ही में सामने आई है। अभी दो दिन पूर्व ही पानीपत जिले के एक सरकारी स्क्ूल की महिला पीजीटी ने अपने ही स्क्ूल के पीटीई पर स्कूल में ही बेड टच करने, अश्लील इशारे करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला पीजीटी का आरोप है कि यह पीटीई स्कूल परिसर में ही पिछले 6 माह से लगातार अश्लील हरकतें करता आ रहा है। स्कूल में जब भी वह एकांत में मौका देखता तो बैड टच कर देता है। पूर्व में भी वह इस संबंध में इसकी  िशकायत विद्यालय प्राचार्य को कर चुकी है लेकिन उन्होंने आरोपी से लिखित में माफी मंगवाकर मामले को रफा-दफा करवा दिया। अध्यापिका के मुताबिक वह इस पीटीई द्वारा लगातार की जा रही अश्लील हरकतों से मानसिंक रुप से बहुत  ज्यादा परेशान हो चुकी है। क्योंकि आरोपी द्वारा बार-बार ऐसा करके उसकी प्रतिष्ठा को धूमिल किया जा रहा है।

घटना-2 : बेशर्मी की इंतहा : मैथ टीचर लैब में ले गया और महिला अध्यापिका का हाथ पकड़ नीचे गिराया और गाल पर करने लगा किस
(19 अप्रैल 2026)।  पंजाब के बठिंडा में स्कूल अध्यापिका के साथ स्कूल के ही टीचर ने कैंपस में ही छेड़खानी और अश्लील हरकतें कीं। दरअसल, आरोपी टीचर ने पहले टीचर को स्कूल के ही कमरे में अलमारी देखने के बहाने बुलाया और अश्लील हरकतें की। महिला टीचर किसी तरह से कमरे बाहर निकली और अन्या साथी टीचर के जानकारी दी। महिला टीचर ने पुलिस को बयान दर्ज कराया कि स्कूल में मेरी जुलाई 2018 में साइंस टीचर के तौर पर नियुक्ति हुई है। मैं जून 2023 से गांव मोड़ मंडी स्कूल में साइंस टीचर के तौर पर काम कर रही हूं। हमारे स्कूल में साइंस लैब का काम चल रहा है। लैब में शेल्फ वगैरह हैं जिनमें शेल्फ ज्यादा होने की वजह से कुछ शेल्फ वगैरह ठीक से बंद नहीं हो रहे थे। इस काम को करवाने के लिए एक कमेटी बनाई गई है। मैं भी कमेटी की मेंबर हूं, मैं खुद मेंबर हूं और उस कमेटी निवासी मोड़ मंडी, जो मैथ टीचर हैं, कमेटी के मेंबर हैं। मैंने सीनियर मैथ टीचर को बताया कि शेल्फ ठीक से बंद नहीं हैं उन्होंने कहा कि चलो देखते हैं कि कौन सी शेल्फ ठीक से बंद नहीं हैं. मैं भी उनके साथ साइंस लैब गई और वहां जाकर मुझसे कहने लगा कि शेल्फ ठीक हो जाएंगी लेकिन तुमने पार्टी नहीं की। मैंने कहा कि कल मैं मिठाई लाई थी और सारे स्टाफ को खिलाई थी, लेकिन तुम थे ही नहीं. फिर मेरे पास आने लगे, तो मैं पीछे हट गई. फिर अचानक मेरा हाथ पकड़ा और मुझे अपनी ओर खींच लिया। महिला टीचर ने बताया कि उन्होंने अपना हाथ मेरे गले में डाला और अपनी ताकत से मेरा गला दबाया और मेरे मुंह के दाहिने हिस्से पर किश किया। जब मैंने खुद को छुड़ाने की कोशिश की, तो टीचर ने जबरदस्ती मेरे मुंह के बाईं ओर किस किया और कहने लगे कि मेरी पार्टी खत्म हो गई है, तो मैंने रोने की कोशिश की। जब मैं रोई तो उन्होंने अपना दूसरा हाथ मेरे मुंह पर रखकर मेरा मुंह दबा दिया और फिर उसने दोनों हाथों से मेरे कंधे पकड़कर मेरे साथ गंदी हरकतें करना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा इस दौरान मैं इतना डर गई कि बताने की हिम्मत नहीं कर सकी. मेरे साथ जो हुआ, उसके बारे में किसी को नहीं बताया. मैंने जबरदस्ती टीचर की पकड़ से खुद को छुड़ाया और तुरंत लैब से बाहर आ गई। टीचर जाते हुए मुझे धमकी देने लगा कि अगर तुमने किसी को कुछ बताया तो तुम्हें इसके नतीजे भुगतने होंगे। मैंने पूरी कहानी हमारे स्कूल में मेरे साथ काम करने वाली लड़कियों (लेडी स्टाफ) को बताई जो मेरा ख्याल रखती थीं. मैंने अपने परिवार की सदस्य को फोन पर मेरे साथ हुई पूरी घटना के बारे में बताया।मैं अपने परिवार के साथ पुलिस स्टेशन आई और उन्हें बताया कि मैंने उन्हें मेरे साथ हुई घटना के बारे में बताने के बाद अपना बयान दिया।पुलिस ने आरोपी टीचर के खिलाफ केस दर्ज कर लिया।

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घटना-3 : गुरुग्राम में 27 छात्राओं ने विज्ञान शिक्षक पर लगाए गंभीर आरोप
अब दूसरी घटना अभी हाल ही में 3 मई 2026 को भी गुरुग्राम के जैकबपुरा स्थित राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की कक्षा नौवीं की एक साथ 27 छात्राओं ने भी विद्यालय के विज्ञान शिक्षक पर अश्लील बातें करने व गंदे इशारे करने के गंभीर आरोप लगाए थे। और विरोध करने पर फेल करने की धमकी भी दी थी। 27 छात्राओं ने लिखित में प्रधानाचार्य को शिकयत सौंपी तो आरोप है कि यहां भी विद्यालय प्राचार्य ने उसे गंभीरता से लेने की बजाए मामले को दबाने की कोशिश की। और शिक्षक का बचाव करते हुए स्कूल की तरफ से जिला शिक्षा अधिकारी को जो लिखकर भेजा गया उसमें शिक्षक को मानसिक रुप से अस्वस्थ बताया गया। बेशर्मी की हद है, एक शिक्षक मानसिक रुप से अस्वस्थ है तो वह स्कूल में क्या लेने आ रहा है। ऐसा व्यक्ति तो कोई भी गंदी अश्लील हरकत कर सकता है। यह सरासर अध्यापक को बचाने के लिए  विद्यालय प्रबंधन द्वारा चली गई चाल नजर आ रही है। सवाल यह है अगर कोई मानसिक रूप से अस्वस्थ है, तो वह बच्चियों के बीच नौकरी कैसे कर रहा है?


घटना-4 :  दिल्ली में मासूम बच्ची से दुष्कर्म में महिला टीचर का रोल भी संदिग्ध
दिल्ली के जनकपुरी इलाके में एक प्री-स्कूल में साढ़े तीन साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म का मामला सामने आया। पुलिस जांच में एक महिला शिक्षिका की भूमिका भी संदिग्ध बताई गई। मासूम बच्ची के परिवार ने न्याय की मांग की, जबकि पुलिस ने मामले में कार्रवाई तेज की। यह घटना सिर्फ अपराध नहीं, बल्कि समाज के भरोसे की हत्या है।


घटना-5 : बिहार में टीसी लेने आई छात्रा का हाथ पकड़ बोला मास्टर किसी के बताना मत, ये सब पर्सनल है
16 मई 2026 को बिहार के औरंगाबाद के उपहारा विद्यालय जहां टीसी लेने आई छात्रा का अध्यापक ने हाथ पकड़ लिया। छात्रा का आरोप है कि उनके ऐसा करने पर मैं कांपने लगी, तो उन्होंने कहा कि कांप काहे रही हो, मैं हूं न. इसके बाद उन्होंने मेरे गले में हाथ डाल दिया और कहा कि इसके बारे में किसी को मत बताना, ये सब पर्सनल है, पीड़िता ने बताया कि मैम ने मेरी मम्मी को फोन करके कहा था कि जो करेंगे राहुल सर ही करेंगे. उनके कमरे पर बेटी को भेजो।


घटना-6 : चंडीगढ़ में सरकारी स्कूल की 24 महिला टीचरों ने लगाए गंभीर आरोप, बातचीत में लिंग आधारित भाषा का इस्तेमाल
12 फरवरी 2026 को चंडीगढ़ के एक सरकारी स्कूल की 24 महिला शिक्षकों ने उत्पीड़न का आरोप लगाया। शिकायत में कहा गया है कि स्कूल का ही एक टीचर उन्हें परेशान करता है, अपमानजनक और लिंग-आधारित भाषा का इस्तेमाल करता है। अक्सर धमकाता है और कई बार ऐसी हरकतें करता है, जिससे महिलाएं असहज महसूस करती हैं। शिकायत दो महीने पहले दर्ज करवाई गई थी। इतना समय बीत जाने के बाद भी आरोपी शिक्षक शिकायतकतार्ओं के साथ एक ही कार्यस्थल पर काम कर रहा है।   
इन महिला अध्यापिकाओं का आरोप था कि अक्सर धमकाता है और कई बार ऐसी हरकतें करता है कि जिससे महिलाएं असहज महसूस करती हैं।                                                                  

घटना-7 : यमुनानगर में बोर्ड परीक्षा के दौरान छात्राओं को बैड टच करने वाला मास्टर गिरफ्तार

17 मार्च 2026 को हरियाणा के यमुनानगर से एक शर्मनाक और दिल दहला देने वाली खबर सामने आई जिसने शिक्षा के पवित्र रिश्ते को तार-तार कर दिया। मॉडल कॉलोनी स्थित गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल में दसवीं कक्षा की परीक्षा के दौरान ड्यूटी पर तैनात एक शिक्षक ने सात छात्राओं के साथ बैड टच और अश्लील हरकतें कीं। परीक्षा खत्म होते ही डरी-सहमी छात्राओं ने परिजनों को आपबीती सुनाई जिसके बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी शिक्षक को हिरासत में ले लिया था।
                 
घटना 8 : यूपी गुड टच-बैड टच की क्लास में खुला सच
25 अक्तूबर 2024 की बात है। उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिÞले के गाँव मधपुरा में एक महिला शिक्षक छात्राओं को 'गुड टच-बैड टच' समझा रही थी। इस दौरान कई बच्चियों ने  स्कूल के ही शिक्षा मित्र पर 'बैड टच' का आरोप लगाया। बच्चियों ने महिला शिक्षकों से बताया था कि शिक्षा मित्र उनको गलत तरीके से छूते हैं.इसके बाद पुलिस ने अभियुक्त को गिरफ़्तार कर लिया था।

घटना-9 : राजस्थान के सरकारी स्कूल में ही गंदी हरकत करते पकड़े गए महिला व पुरुष अध्यापक
मार्च 2022 में राजस्थान टोंक जिले के देवली ब्लॉक स्थित श्रीनगर के सरकारी स्कूल में महिला और पुरुष टीचर ने ऐसी हरकत कर डाली कि बच्चे भी शरमा गये। बच्चों ने यह बात घर जाकर अपने परिजनों को बताई तो वे भड़के उठे। बाद में ग्रामीणों की मांग और हालात को देखते हुये दोनों टीचर्स को वहां हटा दिया गया

घटना-10 : चितौड़गढ़ फाईल्स : ओफिस में ही कई माह तक चलती रही प्रिंसिपल व महिला अध्यापिका की रासलीला, वायरल हुए कई सीसीटीवी पूरे देश ने देखे
(20 जनवरी 2025) :  राजस्थान के राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के एक सरकारी स्कूल में एक अत्यंत शर्मनाक घटना सामने आई जिसमें प्रिंसिपल और महिला शिक्षक को सीसीटीवी फुटेज में आपत्तिजनक स्थिति में देखा गया। यह घटना गंगरार ब्लॉक के अजोलिया खेड़ा ग्राम पंचायत स्थित सालेरा राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय की थी जो कई माह तक सुर्खियों में रही। प्राचार्य कक्ष में प्रिंसिपल और महिला अध्यापिका द्वारा सरेआम की गई इन अश्लील हरकतों के कई वीडियो सोशल मीडिया पर भी जमकर वायरल हुए थे। सीसीटीवी में इन दोनों को स्कूल के अंदर आपत्तिजनक स्थिति में देखा गया।विभिन्न फुटेज में यह भी दिखाई दे रहा है कि प्रिंसिपल और शिक्षिका के बीच लगातार अश्लील बातचीत और हरकतें चलती रही जिससे शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया था और बाद में दोनों शिक्षकों को सस्पेंड कर दिया गया था।

सबसे बड़ा सवाल : हर मामले को दबाने की कोशिश क्यों?
इन घटनाओं में सबसे भयावह बात सिर्फ आरोप नहीं हैं बल्कि आरोपों के बाद सिस्टम का रवैया है।
* समझौता करवाओ
* माफी मंगवाओ
* बदनामी से बचो
* मामला शांत करो
यही वजह है कि ऐसे आरोपी बेखौफ होते जा रहे हैं। उन्हें पता है कुछ दिन शोर होगा, फिर मामला दब जाएगा। फिर वही नौकरी, वही कुर्सी, वही ताकत। क्या यही न्याय है?

आखिर स्कूल प्रबंधन मामले दबाता क्यों है?
क्योंकि उन्हें स्कूल की छवि बचानी होती है
विभागीय कार्रवाई से डर लगता है
राजनीतिक दबाव होता है
और कई बार अंदरूनी सांठगांठ भी होती है
लेकिन बड़ा सवाल यह है क्या स्कूल की छवि, बच्चियों की सुरक्षा से बड़ी है?

क्या अब महिला शिक्षिकाएँ भी सुरक्षित नहीं रहीं?
आज कई महिला अध्यापिकाएँ खुलकर शिकायत करने से डरती हैं। क्यों?

क्योंकि उन्हें लगता है कहीं बदनामी न हो जाए
कहीं नौकरी पर असर न पड़े
कहीं उल्टा उन्हीं पर सवाल न उठने लगें
यानी अपराधी से ज्यादा डरअब सिस्टम से लगने लगा है।

Safety of Girl Students and Women Teachers Under Question in Government Schools

क्या अब स्कूलों में सख्त सुरक्षा नीति जरूरी हो चुकी है?
समाज में अब यह बहस उठ रही है किक्या लड़कियों के स्कूलों में महिला स्टाफ की संख्या बढ़ाई जाए?
क्या छोटे बच्चों के स्कूलों में निगरानी व्यवस्था और मजबूत हो?
क्या हर शिकायत पर स्वत: एफआईआर दर्ज हो?
यह बहस इसलिए उठ रही है क्योंकि घटनाएँ लगातार सामने आ रही हैं। लेकिन असली समाधान सिर्फ स्टाफ बदलना नहीं बल्कि मानसिकता बदलना और कानून सख्त करना है।

क्या किया जाना चाहिए?
1. हर स्कूल में चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी अनिवार्य हो
2. महिला सुरक्षा समिति सक्रिय हो
3. हर शिकायत परएफआईआर दर्ज हो
4. आरोपी को जांच पूरी होने तक स्कूल से दूर रखा जाए
5. छात्राओं के लिए काउंसलिंग और हेल्पलाइन हो
6. फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई हो
7. दोषी पाए जाने पर स्थायी बर्खास्तगी हो

अभिभावकों के लिए चेतावनी
सिर्फ फीस भर देना और रिजल्ट पूछ लेना ही जिम्मेदारी नहीं है। अपनी बच्चियों से खुलकर बात कीजिए। उनके व्यवहार में बदलाव पर ध्यान दीजिए। उन्हें यह भरोसा दीजिए कि वे बिना डर सब कुछ बता सकती हैं
क्योंकि कई बच्चियाँ डर के कारण चुप रह जाती हैं। और यही चुप्पी अपराधियों की सबसे बड़ी ताकत बन जाती है।

अगर अब भी नहीं चेते, तो देर हो जाएगी
यह सिर्फ अलग-अलग घटनाएँ नहीं हैं। यह शिक्षा व्यवस्था के भीतर फैल चुकी गंभीर सड़ांध का संकेत हैं।
अगर आज भी सरकार नहीं जागी, शिक्षा विभाग नहीं जागा, समाज नहीं जागा तो कल स्कूलों पर से भरोसा उठ जाएगा। और जिस दिन माता-पिता को स्कूल से डर लगने लगे उस दिन समझिए समाज की नींव हिल चुकी है।

क्या स्कूल अब भी शिक्षा के मंदिर हैं?
या कुछ विकृत मानसिकता वाले लोगों ने उन्हें अपनी गंदी सोच का अड्डा बना दिया है? फैसला सरकार को करना है। जवाब समाज को देना है। और जागरूक अब अभिभावकों को होना पड़ेगा। क्योंकि दांव पर सिर्फ शिक्षा नहीं हमारी बेटियों की सुरक्षा, सम्मान और भविष्य है।

संदीप कम्बोज
लेखक खबरदार भारत के मुख्य संपादक हैं 

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    Sandeep Kamboj

    संदीप कंबोज

    "प्रिय पाठकों, मैं खबरदार भारत की स्थापना इस विश्वास के साथ कर रहा हूँ कि पत्रकारिता सत्ता की सेवा नहीं, बल्कि जनता की सेवा है।आज के समय में मीडिया पर भरोसा कमजोर हो रहा है, क्योंकि सच की जगह प्रोपेगेंडा और सनसनी फैल रही है। ऐसे समय में खबरदार भारत सत्य, तथ्य और संविधान के साथ खड़ा रहने का प्रयास है।हम किसी दबाव में नहीं, बल्कि केवल सच के पक्ष में काम करेंगे।हमारा लक्ष्य है कि भारत का हर नागरिक जागरूक बने, सवाल पूछे और लोकतंत्र को मजबूत बनाए।आपका विश्वास ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है।सत्य के साथ खड़े रहिए, संविधान की रक्षा करिए।"

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